हैज और निफास के अहकाम: पaki का पूरा गाइड
माहवारी और बच्चेदानी के खून के नियम: कितने दिन, कब इबादत रुकेगी, पाकी की निशानी, रोजों की कजा और इस्तिहाजा का हुक्म।
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How to
Steps in order
- 1तारीखें लिखें, मामूल के अंदर हद तक खून हैज है।
- 2नमाज रोजा कुरान छूना और तवाफ रोकें, जिक्र और दुआ जारी रखें।
- 3सफेद पानी या खुश्की पर गुसल करके इबादत शुरू करें।
- 4हद से ज्यादा खून इस्तिहाजा है, हर नमाज ताजा वुजू से पढें।
- 5रमजान के रोजों की कजा दिन बदिन रखें, नमाज की कजा नहीं।
मुद्दत, पाकी की निशानी और रुकने वाले काम
हैज कम से कम करीब 3 दिन और ज्यादा से ज्यादा 10 दिन हनफी नजरिए से, अक्सर आलिम 15 दिन कहते हैं। अपने मामूल के अंदर खून हैज है। इससे ज्यादा इस्तिहाजा है। निफास ज्यादा से ज्यादा 40 दिन। सफेद पानी या पूरी खुश्की दिखे तो पाकी आ गई। गुसल करके इबादत शुरू करें।
हैज और निफास में चार काम रुकते हैं: पांच नमाज, रोजा, कुरान को छूना और मस्जिद में ठहरना व तवाफ। जिक्र, दुआ, तिलावत सुनना और रोज की दुआएं जारी रहती हैं। माहवारी अल्लाह से दूर नहीं करती।
कजा के नियम, इस्तिहाजा और दवा से बदला चक्र
हैज की छूटी नमाज की कजा नहीं है। आयशा का फतवा है हमें रोजों की कजा का हुक्म था, नमाज की नहीं। रमजान के रोजे दिन बदिन बाद में रखें। दवा से धब्बे या चक्र बिगडे तो अपने मामूल के दिन हैज गिनें, लगातार धब्बा इस्तिहाजा है। सही हालत आलिम को बताएं।
इस्तिहाजा इबादत नहीं रोकता: हर नमाज के लिए ताजा वुजू करें, पैड लगाएं और नमाज रोजा तिलावत सब करें। नबी ने फातिमा बिन्त अबी हुबैश से यही कहा था कि यह रग का खून है। हर नमाज के लिए वुजू करके इबादत करें।
Sources & review
Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim (make up fasts, not prayers; istihada ruling for Fatimah bint Abi Hubaysh); classical fiqh on haiz/nifas durations
Learn personal details from a qualified teacher; minor school differences exist.
Educational content — not a fatwa. See methodology and disclaimer.
Reviewed • 2026-01-01Our methodology
FAQ
Frequently asked questions
क्या माहवारी में नमाज पढ सकते हैं
नहीं। हैज और निफास में नमाज रुकती है और कजा भी नहीं है। पाकी की निशानी पर गुसल करके शुरू करें।
हैज की ज्यादा हद कितने दिन है
हनफी में 10 दिन, अक्सर में 15 दिन। इससे ज्यादा इस्तिहाजा है। हर नमाज ताजा वुजू से पढें और इबादत जारी रखें।
क्या माहवारी में रोजा रखें, कजा होगी
खून में रोजा न रखें। रमजान के हर छूटे रोजे की बाद में कजा रखें। नमाज की तरह रोजा माफ नहीं, कजा जरूरी है।
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