दुहा चाश्त की नमाज - समय रकात और सवाब
दिन चढे की नमाज - सूरज के बाद दो से बारह रकात - शरीर के हर जोड का सदका और दिन भर की किफायत - समय तरीका और आम भ्रम
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How to
Steps in order
- 1सूरज के पंद्रह मिनट बाद वुजू करके दुहा की नियत करें
- 2दो दो करके दो चार या आठ रकात सुकून से पढ़ें
- 3दुहा की तस्बीह और निजी दुआएं पढ़ें
- 4संभव हो तो देर सुबह के अच्छे समय में पढ़ें
समय और रकात
सूरज के करीब पंद्रह बीस मिनट बाद शुरू होती है और जवाल तक रहती है - कम से कम दो - आम तौर पर चार या आठ - ज्यादा से ज्यादा बारह - सबसे अच्छा समय देर सुबह है जब धूप तेज हो - पर दिन चढे कोई भी समय ठीक है
दो रकात तीन सौ साठ जोडों के सदके के लिए काफी हैं - शरीर की सुबह की जकात - घर या काम पर पढ़ें - मस्जिद जरूरी नहीं - कभी की बारह से रोज की दो बेहतर हैं
चाश्त इशराक अव्वाबीन - सफाई
इशराक - फजर से धूप तक जिक्र में बैठने वाले के लिए सूरज के बाद दो रकात - हज और उमरे के सवाब वाली रिवायत - चाश्त दुहा - उसी नमाज को देर सुबह के अच्छे समय में पढ़ना - एक नमाज दो नाम - दो नमाजें नहीं - मगरिब के बाद छह अव्वाबीन की रिवायतें विवादित हैं - आम नफल समझकर पढ़ें
घर की औरतें दुकानदार ग्राहकों के बीच छात्र classes के बीच - दुहा हर schedule में फिट है क्योंकि समय घंटों लंबा है
Sources & review
Sahih Muslim (360 joints; camel-hoof hour); Sunan al-Tirmidhi (Ishraq sitting - grading fair)
Learn personal details from a qualified teacher; minor school differences exist.
Educational content — not a fatwa. See methodology and disclaimer.
Reviewed • 2026-01-01Our methodology
FAQ
Frequently asked questions
चाश्त और इशराक एक या अलग
एक ही नमाज है - फजर के बाद बैठकर शुरू में पढ़ना इशराक है - देर सुबह पढ़ना चाश्त है
दुहा में कितनी रकात हैं
कम से कम दो ज्यादा से ज्यादा बारह - चार या आठ आम आदत है - कभी की बारह से रोज की दो बेहतर
सलातुल अव्वाबीन क्या है
मगरिब के बाद छह रकात वाली कुछ रिवायतें हैं - खास सवाब के दावे पर बहस है - आम नफल समझकर पढ़ें
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