सजदा सहव का तरीका: भूल पर दो सजदे
नमाज में रकात बढ जाए, वाजिब छूट जाए या शक हो तो दो सजदे ठीक करते हैं। कब सहव है, तरीका क्या है और मसलक का फर्क सीखें।
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How to
Steps in order
- 1भूल पहचानें: बढना, वाजिब छूटना या गिनती में सच्चा शक।
- 2फर्ज छूटा हो तो रकात दोहराएं, सिर्फ सहव काफी नहीं।
- 3शक में कम यकीनी संख्या लें और नमाज पूरी करें।
- 4सुभाना रब्बियल आला के साथ दो सजदे, बैठकर तशह्हुद और सलाम।
- 5इमाम के पीछे कुछ न करें, इमाम का सहव सबके लिए काफी है।
कब सहव है और कब नहीं
सजदा सहव तीन भूल पर है: कुछ बढ जाना जैसे ज्यादा रकात, कोई वाजिब छूटना जैसे पहला तशह्हुद, या रकात में सच्चा शक। नबी ने कहा शक हो तो यकीन पर बुनियाद रखो और सलाम से पहले दो सजदे करो। फर्ज छूटे तो रकात दोहरानी होगी, सिर्फ सजदे काफी नहीं।
इन पर सहव नहीं: हल्की बेख्याली पर सब काम पूरे हों, नमाज के बाद शक, और वसवसे वाले बार बार शक। एक नमाज की सब भूल पर एक ही सहव काफी है। जमात में इमाम का सहव काफी है, पीछे वाले अलग न करें।
तरीका और मसलक का फर्क
तरीका: नमाज के आखिर में दो सजदे करें, हर सजदे में सुभाना रब्बियल आला कहें, फिर बैठकर तशह्हुद पढें और सलाम फेरें। हनफी सलाम के बाद करते हैं, शाफई और हंबली पहले। मालिकी बढने और छूटने में फर्क करते हैं। सब सही तरीका है, अपने मसलक पर चलें, झगडा न करें।
शक में कम यकीनी संख्या लें: 3 या 4 में शक हो तो 3 पक्की मानकर पूरी करें और सहव करें। हर नमाज में शक हो तो वसवसा समझें। पहले पक्के ख्याल पर चलें और बार बार सजदे न करें, क्योंकि शैतान इबादत मुश्किल बनाना चाहता है।
Sources & review
Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim (the Prophet’s ﷺ forgetfulness prostrations; doubt hadith in Sahih Muslim); classical fiqh on placement before/after salam
Learn personal details from a qualified teacher; minor school differences exist.
Educational content — not a fatwa. See methodology and disclaimer.
Reviewed • 2026-01-01Our methodology
FAQ
Frequently asked questions
सजदा सहव कैसे करते हैं
नमाज के आखिर में सुभाना रब्बियल आला के साथ दो सजदे करें, बैठकर तशह्हुद पढें और सलाम फेरें। हनफी बाद में, शाफई हंबली पहले करते हैं। अपने मसलक पर चलें।
सजदा सहव कब जरूरी है
कुछ बढ जाए, वाजिब छूटे या रकात में सच्चा शक हो। फर्ज छूटे तो रकात दोहराएं। हल्का शक और वसवसा पर कुछ नहीं।
हर बार रकात में शक होता है, क्या करूं
कम यकीनी पर पूरी करके सहव करें। हर नमाज में हो तो वसवसा है। पहले ख्याल पर चलें, दोहराएं नहीं। शक वाली गाइड पढें।
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