ईमान के छह स्तंभ - आसान व्याख्या
ईमान के छह स्तंभ हर मुसलमान को मानने जरूरी हैं। अल्लाह, फरिश्ते, किताबें, रसूल, आखिरी दिन और तकदीर। हर एक की सरल व्याख्या और मांग।
Also searched as: articles of faith islam | iman e mufassal | six pillars of iman | aqeedah basics | iman ke arkaan | ईमान के छह अरकान | ईमान ए मुफस्सल | six pillars iman hindi
How to
Steps in order
- 1छह को याद करें। अल्लाह, फरिश्ते, किताबें, रसूल, आखिरी दिन, तकदीर।
- 2सीखें हर एक क्या मांगता है। इबादत, सम्मान, तिलावत, आज्ञा, तैयारी, संतोष।
- 3बच्चों को सबसे पहले ईमान ए मुफस्सल सिखाएं।
- 4हर साल छहों को दोहराएं। अमल से कहे को सच्चा साबित करें।
छह रुक्न और हदीस ए जिबरील
जब जिबरील ने पैगंबर से पूछा ईमान क्या है, तो उत्तर मिला। अल्लाह, फरिश्तों, किताबों, रसूलों, आखिरी दिन और अच्छी बुरी तकदीर पर विश्वास। यही ईमान ए मुफस्सल है। हर बच्चे को सबसे पहले यही याद कराएं।
विश्वास का अर्थ दिल से मानना और जुबान से कहना है, अमल से सजा हुआ। नेकी से ईमान बढ़ता है, गुनाह से घटता है। एक स्तंभ का इनकार पूरी इमारत गिरा देता है।
हर स्तंभ रोजमर्रा में क्या मांगता है
अल्लाह। केवल उसी की इबादत, उसके 99 नाम सीखना और तकदीर पर भरोसा। फरिश्ते। उनका सम्मान। किताबें। रोज कुरान पढ़ना और उसी से फैसला करना। रसूल। पैगंबर मुहम्मद की सबसे बढ़कर आज्ञा और प्रेम।
आखिरी दिन। हर शाम ऐसे जिएं जैसे सुबह न आए। कर्ज चुकाएं, माफ करें, रोज तौबा करें। तकदीर। पूरे साधन अपनाएं, फिर दिल को आराम दें। जो छूट गया वह कभी मिलने वाला न था।
Sources & review
Sahih Muslim (hadith of Jibril); Quran 2:177, 2:285 (pillars of belief); classical creed texts (Tahawiyyah tradition)
Learn personal details from a qualified teacher; minor school differences exist.
Educational content — not a fatwa. See methodology and disclaimer.
Reviewed • 2026-01-01Our methodology
FAQ
Frequently asked questions
इस्लाम में ईमान के छह रुक्न क्या हैं
अल्लाह, फरिश्तों, किताबों, रसूलों, आखिरी दिन और अच्छी बुरी तकदीर पर विश्वास। हदीस ए जिबरील से तय हैं।
ईमान ए मुफस्सल क्या है
पूरी दुनिया में याद किया जाने वाला वाक्य। मैं अल्लाह, फरिश्तों, किताबों, रसूलों, आखिरी दिन पर ईमान लाया और अच्छी बुरी तकदीर अल्लाह की ओर से है और मौत के बाद जी उठना है।
क्या ईमान बढ़ता और घटता है
जी हां। नेकी से बढ़ता है, नाफरमानी से घटता है। फर्ज की हिफाजत करें, नफल बढ़ाएं, गलती पर तुरंत तौबा करें।
Duas
Related duas
Learn