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Hikmah Noor
GuidePillars in Practice✆

सूरह यासीन - कुरआन का दिल - विषय और कब पढ़ें

कुरआन का दिल कही जाती है - तिरासी आयतों में कयामत नुबूवत और अल्लाह की कुदरत - रात में मरने वालों के लिए और जरूरत में - हर फजीलत की सही grading के साथ

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How to

Steps in order

  1. 1सूरह यासीन रोज रात तर्जुमे से धीरे से पढ़ें
  2. 2हर हिस्से से एक तफसीर note पढ़ें - रसूल निशानियां कयामत
  3. 3बीमार और मरने वालों पर उम्मीद से पढ़ें अंधविश्वास से नहीं
  4. 4जरूरत के लिए तय गिनती वाली रस्मों से बचें - इखलास ही काफी है

तीन हिस्सों में विषय

शुरू में कुरआन की हिकमत बंद दिल और हबीब नज्जार - दूर शहर से दौडकर आने वाला मोमिन जिसने रसूलों का साथ दिया - बीच में मरी जमीन का जीना सूरज चांद का चक्कर लदे जहाज - फिर सूर और हिसाब - आखिर में कुन फयकून - दोबारा पैदा करना अल्लाह के लिए पहले जैसा आसान है

रात को तर्जुमे से पढ़ें - मरने वालों पर पढ़ने की रिवायत में बहस है - अमल का फर्क है और नियत अहम है - अहम जरूरत से पहले हाजिरी से पढ़ें

सही grading

कुरआन का दिल और रात को पढ़ने पर बख्शिश वाली रिवायतें कमजोर से ठीक दर्जे की हैं - कुरआन की मुहब्बत में पढ़ें पक्के सौदे के लिए नहीं - पक्की फजीलतें मुल्क कहफ और बकरा की आखिरी दो आयतों की हैं

रोज एक तफसीर note के साथ पढ़ें - सोचकर पढ़ने वाले को बिना सोचे इकतालीस बार वाले बाजारू तरीकों से ज्यादा मिलता है

Sources & review

Quran 36; Sunan al-Tirmidhi (“heart of the Quran” - grading discussed); read the Arabic in our surah reader

Learn personal details from a qualified teacher; minor school differences exist.

Educational content — not a fatwa. See methodology and disclaimer.

Reviewed • 2026-01-01Our methodology

FAQ

Frequently asked questions

क्या यासीन सच में कुरआन का दिल है

तिरमिजी में ऐसा कहा गया है - विद्वान grading पर बहस करते हैं - विषय के लिहाज से यह मुहब्बत वैसे भी ठीक है

जरूरत के लिए इकतालीस बार यासीन

तय गिनती की कोई रस्म साबित नहीं - हाजिरी से पढ़ें और सीधे अल्लाह से मांगें - यही सुन्नत है

मय्यित के लिए यासीन पढ़ना

मुर्दों पर पढ़ो वाली रिवायत पर बहस है - फायदा पहुंचाने की नियत से पढ़ना कई जगह चलता है

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