कुर्बानी के नियम - हुक्म समय और शर्तें
ईद उल अजहा की कुर्बानी इब्राहीम की कुर्बानी की याद है - मालदार पर हनफी में वाजिब और अन्य में ताकीदी सुन्नत - ईद की नमाज के बाद से तेरह तक
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How to
Steps in order
- 1निसाब की पुष्टि करें और बकरी या गाय ऊंट का हिस्सा चुनें
- 2दस से पहले जानवर या भरोसेमंद charity book करें
- 3दस से तेरह में ईद की नमाज के बाद दुआ और किबला रुख से जबह करें
- 4तीन हिस्सों में बांटें और खाल सदका दें - कसाई की मजदूरी में न दें
कौन करे और कब
हर बालिग मुसलमान जो बुनियादी जरूरत से अधिक निसाब रखे एक बकरी या गाय ऊंट में सात में से एक हिस्सा दे - हर व्यक्ति पर या घर पर - अपने मत पर चलें - समय ईद की नमाज के बाद दस से तेरह की मगरिब तक है - नमाज से पहले का जानवर आम गोश्त है कुर्बानी नहीं
खुद न कर सकें तो वकील या charity को दें - नियत और भुगतान काफी है - जरूरतमंद देश में कुर्बानी ठीक है अगर दिनों में हो
जानवर और तरीका
बकरी एक साल - अच्छा पला छह माह का मेमना हनफी में ठीक - गाय दो साल ऊंट पांच साल - स्वस्थ ऐब से पाक और मालिकाना हो - बिस्मिल्लाह वल्लाहु अकबर अल्लाहुम्मा हाजा मिन्का व लका कहें - किबला रुख तेज छुरी और खून पूरी तरह बहने दें
खरीद या जबह के समय नियत करें - मृतक को नियत में शामिल करने पर उन्हें भी सवाब मिलता है
Sources & review
Quran 22:36-37; Sahih al-Bukhari and Sahih Muslim (the Prophet’s two horned rams)
Learn personal details from a qualified teacher; minor school differences exist.
Educational content — not a fatwa. See methodology and disclaimer.
Reviewed • 2026-01-01Our methodology
FAQ
Frequently asked questions
कुर्बानी फर्ज है या सुन्नत
हनफी में निसाब वाले पर वाजिब - जमहूर में ताकीदी सुन्नत - ताकत वाला कभी न छोडे
ईद की नमाज से पहले जबह ठीक है
नहीं - वह आम गोश्त है - कुर्बानी ईद की नमाज के बाद ही होगी - दिनों में दोहराएं
क्या विदेश या online कुर्बानी हो सकती है
हां - वकील या verified charity को दें - उस जगह दस से तेरह में जबह हो
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